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देखिए, आज की हो या कल की हो, व्यक्ति का शरीर जब से बना है उस शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें प्रकृति के कुछ नियमों का पालन करना पडता है। योग प्रकृति से जुडी हुई वो सुंदरतम् विधा है जिससे व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है। अत: योग एक जीवन जीने की कला, योग एक जीवन जीने की विधा, योग एक वो परिकल्प जिससे हम अपने अस्तित्व, अपनी चेतना से जुडते हैं गहरे। आज के परिपेक्ष्य में भी उतनी ही आवश्यकता है योग की जितनी सदियों पहले थी। मायने, व्यक्ति का शरीर, व्यक्ति का मन, व्यक्ति का चित, व्यक्ति की चेतना का स्वरूप तो एक ही जैसा बना रहता है बाहर की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। और बदलती हुई परिस्थितियों के परिवेश में यदि देखा जाए योग को तो वो अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। आज जो चारों तरफ प्रदूषण है, जो आज की प्रतियोगिताएं हैं, प्रतिस्पर्धाएं हैं, उन प्रतियोगिताओं और प्रतिस्पर्धाओं में जो व्यक्ति आगे बढ़ना चाहता है तो उसके लिए भी योग एक बहुत सशक्त माध्यम है जो कि आंतरिक उर्जा प्रदान करता है। आप योग द्वारा बहुत सी बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। क्या योग द्वारा कैंसर और एड्स जैसी बिमारियों का भी इलाज किया जा सकता है? अन्य किन प्रकार की बिमारियों की चिकित्सा की जा सकती है, क्या स्ट्रैस वगैरह का भी इलाज योग द्वारा संभव है? स्ट्रैस तो एक सामान्य चीज है। तनाव के लिए तो योग एक सबसे मूल मँत्र है। इसके अतिरिक्त हार्ट के ब्लोकिज, आर्थराइटि्स, अस्थमा, हार्पटेंशन व डायबिटिज इत्यादि हैं। व्यक्ति की तमाम समस्याओं का योग द्वारा समाधान होता है और असाध्य रोगों का भी। कुछ समय पूर्व सुनने में आया था कि भारत के राष्ट्रपति ने आपसे कुछ रोगियों की चिकित्सा करने के बारे में आग्रह किया था? वे किस प्रकार के रोगी हैं जिनका आप राष्ट्रपति के आग्रह पर उपचार कर रहे हैं? हमने मुख्य रूप से इन्हीं रोगों को चुना जैसे हार्ट के ब्लोकिज, डायबिटिज, मोटापा, आर्थराइटि्स और जो आम व्यक्ति की जिंदगी में बीमारियाँ हैं। करोङों लोग उनसे पीडित हैं, और वे बिना दवा के इससे स्वस्थ हो सकते हैं। |